“ हे प्रभु, मैंने आपके प्राचीन न्याय को याद किया और अपने आप को सांत्वना दी।”
कभी-कभी याद करने से ही शांति मिलती है। जब आप परमेश्वर के वादों, उनके नियमों और उनकी निष्ठा को याद करते हैं, तो मन में फिर से शांति का संचार होने लगता है। जब संकट मंडरा रहा हो, तब उनका वचन ही आपका सहारा होता है।
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