इसलिए परमेश्वर के अधीन हो जाओ। शैतान का विरोध करो और वह तुमसे दूर भाग जाएगा।
शांति समर्पण से आती है । पहले ईश्वर के प्रति समर्पित हो जाओ, फिर शत्रु का सामना करो। हम अपनी शक्ति से आध्यात्मिक लड़ाइयाँ नहीं लड़ सकते। लेकिन जब हम ईश्वर के साथ जुड़ जाते हैं, तो शैतान को भागना ही पड़ता है।
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