“जन्म के समय मेरी मृत्यु क्यों नहीं हुई? गर्भ से बाहर आते ही मैं नष्ट क्यों नहीं हो गया?”
अय्यूब हताश हो जाता है और सोचने लगता है कि उसका जन्म ही क्यों हुआ। पीड़ा से व्याकुल होकर वह सोचता है कि जन्म के समय ही मृत्यु क्यों नहीं आ गई। यह शोक और मानवीय पीड़ा का एक मार्मिक और सच्चा चित्रण है।
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