क्योंकि हमारा महायाजक ऐसा नहीं है जो हमारी कमजोरियों के प्रति सहानुभूति न रख सके, बल्कि वह हमारी तरह हर तरह से परखा गया, फिर भी उसने पाप नहीं किया।
यीशु हमारी कठिनाइयों को समझते हैं क्योंकि उन्होंने उन सभी प्रकार के प्रलोभनों का अनुभव किया है जिनका हम सामना करते हैं। फिर भी, वे पापरहित रहे। उनकी परिपूर्ण सहानुभूति और निष्पाप जीवन उन्हें हमारे लिए एक विश्वसनीय और दयालु मार्गदर्शक बनाते हैं।
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